यह कैसे काम करती है
आसान काम की बड़ी मात्रा आधार बनाती है, ऊपर थोड़ी-थोड़ी कठिन ट्रेनिंग। एक आम हफ़्ता 75 से 80 प्रतिशत आसान, 15 से 20 प्रतिशत थ्रेशोल्ड, और 5 प्रतिशत या कम उच्च तीव्रता।
पिरामिडल बनाम पोलराइज़्ड
दोनों में बड़ा आसान आधार है। पिरामिडल थ्रेशोल्ड (ज़ोन 3 से 4) काम का एक अच्छा हिस्सा रखती है। पोलराइज़्ड उस बीच को न्यूनतम करती है और कठिन हिस्से को ज़ोन 5 में धकेलती है।
इसे कैसे लागू करें
ज़्यादातर सत्र आसान ज़ोन 1 से 2 में रखें। हफ़्ते में एक-दो थ्रेशोल्ड या टेम्पो सत्र और थोड़ी-सी उच्च तीव्रता जोड़ें। कई एथलीट बेस और बिल्ड चरण में पिरामिडल ट्रेनिंग करते हैं, फिर प्रतियोगिता से पहले पोलराइज़्ड की ओर बढ़ते हैं।
FAQ
पिरामिडल या पोलराइज़्ड ट्रेनिंग में से कौन बेहतर है?
कोई भी हर हाल में बेहतर नहीं। यह आपके इवेंट, ट्रेनिंग इतिहास और साल के समय पर निर्भर है। एलीट एंड्योरेंस एथलीटों पर शोध (Seiler, Stöggl और Sperlich) दिखाता है कि कई बेस चरण में पिरामिडल ट्रेनिंग करते हैं, फिर प्रतियोगिता से पहले पोलराइज़्ड की ओर बढ़ते हैं।
पिरामिडल ट्रेनिंग में सामान्य ज़ोन विभाजन क्या होता है?
आम पिरामिडल बँटवारा है: ट्रेनिंग समय का 75 से 80 प्रतिशत कम तीव्रता (ज़ोन 1 से 2) पर, 15 से 20 प्रतिशत थ्रेशोल्ड (ज़ोन 3 से 4) पर, और 5 प्रतिशत या कम उच्च तीव्रता (ज़ोन 5) पर।
पिरामिडल ट्रेनिंग किसे करनी चाहिए?
पिरामिडल ट्रेनिंग उन एथलीटों के लिए है जो एरोबिक आधार बना रहे हैं और जिनके इवेंट में थ्रेशोल्ड की बड़ी माँग है: लंबे टाइम ट्रायल, मैराथन, लगातार चढ़ाई। अगर नियमित थ्रेशोल्ड काम से आपको फ़ायदा होता है, तो यह समझदार डिफ़ॉल्ट है।

